गौधाम योजना 2025: छत्तीसगढ़ के चरवाहों व गौसेवकों के लिए खुशखबरी

गौधाम योजना

छत्तीसगढ़ सरकार मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और पशुधन संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए ‘गौधाम योजना’ लागू कर रही है। इस योजना का उद्देश्य पशुधन की सुरक्षा, जैविक खेती, चारा उत्पादन और गौ-आधारित उद्योगों को प्रोत्साहित करना है। इसके अंतर्गत निराश्रित व घुमंतु गौवंशीय पशुओं की देखभाल की जाएगी, साथ ही चरवाहों और गौसेवकों को स्थायी आय का अवसर भी प्रदान किया जाएगा।

गौधाम योजना का उद्देश्य :

उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूत करते हुए पशुधन की सुरक्षा,  चारा उत्पादन और गौ-आधारित उद्योगों को बढ़ावा देना है। इस योजना के तहत निराश्रित और घुमंतु गौवंशीय पशुओं की देखभाल के लिए हर गौधाम में अधिकतम 200 पशुओं की व्यवस्था होगी, साथ ही पानी, बिजली और शेड जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। चरवाहों और गौसेवकों को नियमित मानदेय दिया जाएगा, चारा विकास के लिए आर्थिक सहायता मिलेगी, और गोबर व गौमूत्र से खाद, कीटनाशक, अगरबत्ती, दंतमंजन जैसे उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण देकर उन्हें आय के नए साधन प्रदान किए जाएंगे, जिससे गांवों में रोजगार के अवसर और सतत् विकास दोनों को गति मिले।

गौसेवकों और चरवाहों के मानदेय की व्यवस्था

इस योजना के अंतर्गत, चरवाहों (पशुपालकों) को प्रति माह ₹10,916 का मानदेय प्रदान किया जाएगा। वहीं, गौसेवकों को हर महीने ₹13,126 की राशि दी जाएगी, ताकि वे अपनी सेवाओं को सुचारू रूप से जारी रख सकें।

इसके अलावा, पशुओं के चारे के लिए भी सरकार द्वारा प्रतिदिन निर्धारित राशि उपलब्ध कराई जाएगी। उत्कृष्ट गौधामों (अच्छे स्तर के गौशालाओं) को पहले वर्ष में प्रति पशु ₹10 प्रतिदिन, दूसरे वर्ष में ₹20 प्रतिदिन, तीसरे वर्ष में ₹30 प्रतिदिन और चौथे वर्ष से ₹35 प्रतिदिन का भुगतान किया जाएगा।

यह प्रावधान सुनिश्चित करता है कि न केवल पशुओं की देखभाल बेहतर तरीके से हो, बल्कि गौसेवकों और चरवाहों को भी उनके कार्य के अनुरूप उचित आर्थिक सहयोग मिल सके।

गौधाम कहां और कैसे बनेंगे?

इस योजना के तहत गौधाम केवल उन्हीं सरकारी भूमि पर स्थापित किए जाएंगे, जहां पहले से ही सुरक्षित घेरा, पशुओं के लिए शेड, पानी और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं मौजूद हों। जिन स्थानों पर यह आधारभूत ढांचा पहले से तैयार है, वहां उपलब्ध चारागाह की जमीन पर हरे चारे का उत्पादन भी किया जाएगा।

संचालन की जिम्मेदारी केवल पंजीकृत गौशालाओं को ही नहीं, बल्कि इच्छुक स्वयंसेवी संस्थाओं, एनजीओ, ट्रस्ट, फार्मर प्रोड्यूसर कंपनियों और सहकारी समितियों को भी दी जा सकती है, जो इसके लिए आवेदन करेंगी।

आरंभिक चरण में गौधाम राज्य के प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों से लगे ग्रामीण इलाकों में बनाए जाएंगे। आवेदन प्राप्त होने के बाद जिला स्तरीय समिति उनकी जांच करेगी और चयनित संस्थाओं की सूची छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग को भेजेगी। आयोग से स्वीकृति मिलने के बाद संचालन का कार्य संबंधित संस्था को सौंप दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा है कि इस योजना से न केवल आवारा पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि बड़ी संख्या में चरवाहों और गौसेवकों को नियमित आय का अवसर मिलेगा। साथ ही, यह कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाने में मदद करेगा।

नोट: यह ब्लॉग केवल जानकारी के उद्देश्य से है। आवेदन करने से पहले कृपया सरकारी वेबसाइट पर जाकर नवीनतम निर्देशों और पात्रता की पुष्टि जरूर करें।
हम किसी नुकसान के लिए उत्तरदायी नहीं होंगे।

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