Tukda bandi kayda: जानें छोटे भूखंडों की खरीद-बिक्री पर नए नियम, 1–3 गुंठा ज़मीन के लेन-देन की सुविधा, सुधार और आम लोगों व किसानों को मिलने वाले लाभ।”
Tukda bandi kayda :
1947 में लागू किए गए इस कानून का मुख्य उद्देश्य था कि खेती व्यवस्थित और बड़े पैमाने पर हो, छोटे-छोटे ज़मीन के टुकड़े न हों और खेती की उत्पादकता कम न हो। इसके तहत, अगर किसी व्यक्ति की ज़मीन एक ही गाँव में अलग-अलग जगहों पर थी, तो उसे जोड़कर एक भूखंड बनाया जाए। राज्य सरकार ने जायद और बाग़बानी वाली ज़मीन के लिए न्यूनतम क्षेत्र तय किया, जिससे इससे कम क्षेत्र की ज़मीन की खरीद-बिक्री अवैध हो।
हालांकि समय के साथ इस कानून का असर कम होता गया और खासकर शहरी इलाकों में ज़मीन छोटे-छोटे टुकड़ों में बिकी। सरकार ने इसे सुधारने के लिए जायद ज़मीन के लिए न्यूनतम 20 गुंथ और बाग़बानी के लिए 10 गुंथ की सीमा तय की, लेकिन इसके बावजूद आज भी छोटे-छोटे टुकड़े बड़ी संख्या में निजी तौर पर बेचे जा रहे हैं।
Tukda bandi kayda 2025
अब एक गुंठा ज़मीन की खरीद-बिक्री संभव होगी। हाल ही में संपन्न हुए हिवाळी अधिवेशन में इस संबंध में विधेयक मंजूर कर दिया गया है। पहले कई सालों तक छोटे-छोटे भूखंडों की खरीद-बिक्री पर रोक थी, लेकिन अब इस कानून में बदलाव होने से 1–2 गुंठा ज़मीन के लेन-देन आसानी से किए जा सकेंगे। राज्यपाल की मंजूरी और अध्यादेश के बाद यह अधिनियम लागू हो गया है, जिससे आम लोगों और किसानों को सीधे लाभ मिलेगा।
महाराष्ट्र सरकार ने 15 जुलाई 2025 को एक अधिसूचना जारी की है। इसमें कहा गया है कि महानगरपालिका, नगरपरिषद, नगरपंचायत और कुछ विशेष नियोजन प्राधिकरणों के क्षेत्र को छोड़कर अब राज्य के सभी तहसील इस कानून के तहत ‘स्थानीय क्षेत्र’ माने जाएंगे। यानी इन इलाकों में ज़मीन को अनावश्यक छोटे-छोटे टुकड़ों में बाँटने पर सख़्त रोक रहेगी।
Tukda bandi kayda में नई सुधार से आम लोगों को राहत
सरकार ने तुकडेबंदी कानून (Tukda bandi kayda) में हाल ही में सुधार किया है, जिससे अब आम लोग छोटे भूखंडों पर घर बना सकते हैं और 1, 2 या 3 गुंठा ज़मीन की खरीद-बिक्री आसानी से कर पाएंगे। 15 अक्टूबर 2024 को जारी अध्यादेश के तहत 15 नवंबर 1965 से 31 दिसंबर 2023 तक निवासी, औद्योगिक और वाणिज्यिक क्षेत्रों में हुए ज़मीन के टुकड़ों का 5% रेडीरेक्शन भरकर उन्हें नियमित किया जा सकेगा।
Tukda bandi kayda का लाभ
अब रिहायशी क्षेत्रों में 1 गुंठा ज़मीन का टुकड़ा बनाया जा सकेगा। इस निर्णय से किसानों, ज़मीन मालिकों और छोटे प्लॉट लेने वालों को राहत मिलेगी। पहले तुकडेबंदी कानून(Tukda bandi kayda )की वजह से छोटे भूखंडों के व्यवहार अटके हुए थे, लेकिन अब ये लेन-देन पूरे हो पाएंगे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जहाँ शहरी क्षेत्र विकसित हो चुके हैं, वहाँ इस कानून को 1 गुंठा तक निरस्त किया जाएगा।
Tukda bandi kayda :छोटी ज़मीन के लेन-देन पर रोक
तुकडेबंदी कानून (Tukda bandi kayda) के तहत छोटे-छोटे भूखंडों को खेती के लिए अनुपयोगी होने से रोकने के लिए खरीद-बिक्री पर रोक लगाई गई थी। पुराने नियमों के अनुसार, यदि ज़मीन का सही माप करके व्यवहार किया गया हो, तो उसे नियमित किया जा सकता था। लेकिन जिन ज़मीनों पर ग्रामपंचायत की अनुमति से निर्माण हुआ, उन्हें कानून के अनुसार अवैध माना जाता है और कोई कानूनी संरक्षण नहीं मिलेगा।
नोट: यह ब्लॉग केवल जानकारी के उद्देश्य से है। आवेदन करने से पहले कृपया सरकारी वेबसाइट पर जाकर नवीनतम निर्देशों और पात्रता की पुष्टि जरूर करें।
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