मध्यप्रदेश में महिलाओं की आय और पर्यावरण सुरक्षा के लिए प्रभावशाली योजना ,Ek Bagiya Maa Ke Naam Yojana 2025

महिलाएं अब घर बैठे पौधरोपण करके कमा सकती हैं और पर्यावरण को भी बचा सकती हैं। जानें आवेदन प्रक्रिया और फायदे Ek Bagiya Maa Ke Naam Yojana के तहत।

Ek Bagiya Maa Ke Naam Yojana

मध्यप्रदेश सरकार ने महिलाओं को सशक्त बनाने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘एक बगिया मां के नाम’ परियोजना(Ek Bagiya Maa Ke Naam Yojana) की शुरुआत की है। इस योजना के तहत स्व-सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं अपनी निजी भूमि पर फलदार पौधे लगा रही हैं। सरकार ने इस योजना के लिए लगभग 1000 करोड़ रुपये का बजट तय किया है।

पौधों की खरीद से लेकर उनकी देखभाल और सुरक्षा तक की जिम्मेदारी सुनिश्चित करने के साथ ही सिंचाई के लिए 50 हजार लीटर क्षमता वाला जलकुंड बनाने हेतु भी वित्तीय सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है।

Ek Bagiya Maa Ke Naam Yojana क्या है

मध्यप्रदेश सरकार ने महिलाओं की आय बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से “एक बगिया मां के नाम” परियोजना (Ek Bagiya Maa Ke Naam Yojana) की शुरुआत की है। इस योजना के तहत महिला स्वयं-सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं को अपनी निजी भूमि पर फलदार पौधे लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

सरकार द्वारा पौधों की आपूर्ति के साथ ही खाद और सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि पौधों की देखभाल आसानी से की जा सके। इसके अतिरिक्त, लाभार्थी महिलाओं को आवश्यक प्रशिक्षण भी प्रदान किया जा रहा है ताकि वे आधुनिक तकनीक के उपयोग से बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकें।

यह योजना 15 अगस्त से 15 सितंबर 2025 की अवधि में संचालित होगी। इसमें खेती को अधिक लाभकारी बनाने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग बढ़ावा दिया जाएगा और किसानों व महिलाओं को इसके अनुरूप प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा।यह पहल न केवल महिलाओं की आय बढ़ाने में सहायक होगी, बल्कि गांवों में हरियाली बढ़ाने और पर्यावरण के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी।

एक बगिया मां के नाम’ योजना पर सरकार का बड़ा निवेश

मध्यप्रदेश सरकार ने ‘एक बगिया मां के नाम’ योजना (Ek Bagiya Maa Ke Naam Yojana) के लिए 900 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है। इस योजना के तहत पात्र किसानों को 3 लाख रुपये तक की सहायता राशि तीन किस्तों में दी जाएगी। पौधारोपण कार्यक्रम दो चरणों में चलेगा—30 जून से 15 अगस्त तक सरकारी भूमि पर और 15 अगस्त से 15 सितंबर तक निजी भूमि पर फलदार पौधे लगाए जाएंगे। यह पहल महिलाओं और किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के साथ-साथ राज्य में हरियाली और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा देगी।

एक बगिया मां के नाम’योजना में अव्वल जिले और ब्लॉक

एक बगिया मां के नाम’ योजना(Ek Bagiya Maa Ke Naam Yojana) के अंतर्गत जारी प्रगति में खंडवा, सिंगरौली, बैतूल, देवास और आगर मालवा जिलों ने अब तक सबसे अच्छा प्रदर्शन किया है। इसी तरह ब्लॉकों में खंडवा, चितरंगी, पंधाना, पुनासा और खालवा ने विशेष उपलब्धि दर्ज की है।

ड्रोन तकनीक से निगरानी होगी आसान

‘एक बगिया मां के नाम’ योजना (Ek Bagiya Maa Ke Naam Yojana)के अंतर्गत पौधारोपण कार्य की निगरानी अब मध्यप्रदेश इलेक्ट्रिक डेवेलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा की जाएगी। इसके लिए ड्रोन तकनीक का उपयोग किया जाएगा, जिससे चयनित भूमि, गड्ढों और लगाए गए पौधों की वास्तविक स्थिति का पता लगाया जा सकेगा। आगे भी ड्रोन से लगातार मॉनिटरिंग की जाएगी, ताकि पौधों की देखभाल और प्रगति पर नजर रखी जा सके। इस प्रक्रिया में वैज्ञानिक पद्धति अपनाई जा रही है, जिससे पौधारोपण अधिक प्रभावी और सफल हो सके।

योजना में शामिल महिलाओं की संख्या

एक बगिया मां के नाम’ योजना शुरू होने के समय 31,300 महिलाओं को इसका लाभ पहुंचाना लक्ष्य था। योजना के प्रति महिलाओं की बढ़ती रुचि के चलते अब तक 40,406 महिलाओं ने पंजीकरण कराया है। निजी भूमि पर बगिया लगाने का कार्य 15 अगस्त से 15 सितंबर तक चलेगा, और इस दौरान 30 लाख फलदार पौधे लगाने का प्रयास किया जाएगा।

योजना में शामिल होने की पात्रता

‘एक बगिया मां के नाम’ परियोजना (Ek Bagiya Maa Ke Naam Yojana) का लाभ पाने के लिए महिलाओं के पास न्यूनतम 0.5 एकड़ और अधिकतम 1 एकड़ जमीन होना अनिवार्य है। इस सीमा से कम या ज्यादा भूमि वाली महिलाओं को योजना का लाभ नहीं मिलेगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लाभार्थियों के लिए योजना प्रभावी और समान रूप से उपलब्ध हो।

ऐप के माध्यम से हितग्राही चयन

एक बगिया मां के नाम’ योजना(Ek Bagiya Maa Ke Naam Yojana) में महिलाओं का चयन एक विशेष मोबाइल ऐप के माध्यम से किया जा रहा है, जिसे मनरेगा परिषद और MPSEDC ने मिलकर विकसित किया है। यदि चयनित महिला की अपनी जमीन नहीं है, तो उनके परिवार के सदस्यों (पति, पिता, ससुर या पुत्र) की सहमति से ही पौधारोपण किया जाएगा।

अत्याधुनिक तकनीक से पौधरोपण

प्रदेश में पहली बार सिपरी सॉफ्टवेयर की मदद से पौधरोपण किया जा रहा है। इसके माध्यम से जमीन का चयन, भूमि परीक्षण, जलवायु और पौधों के लिए उपयुक्त स्थान का निर्धारण किया जाता है। साथ ही, पौधों की रोपाई का सही समय और सिंचाई की उपलब्धता भी वैज्ञानिक तरीके से तय की जाती है। अगर जमीन पौधरोपण के योग्य नहीं पाई जाती, तो कार्य नहीं किया जाएगा। योजना की सफलता सुनिश्चित करने के लिए संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षण भी दिया गया है।

परियोजना में ग्राम पंचायतों की भागीदारी

एक बगिया मां के नाम’ योजना प्रदेश भर के 313 ब्लॉकों की 9,662 ग्राम पंचायतों तक पहुँच चुकी है। इन पंचायतों में आने वाले 10,162 गांवों में सर्वेक्षण कर महिलाओं का पंजीकरण सुनिश्चित किया गया है।

नोट: यह ब्लॉग केवल जानकारी के उद्देश्य से है। आवेदन करने से पहले कृपया सरकारी वेबसाइट पर जाकर नवीनतम निर्देशों और पात्रता की पुष्टि जरूर करें।
हम किसी नुकसान के लिए उत्तरदायी नहीं होंगे।

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