केंद्र सरकार ने क्रिटिकल मिनरल्स की रीसाइक्लिंग बढ़ाने के लिए ₹1500 करोड़ की प्रोत्साहन योजना मंजूर की। जानें योजना की अवधि, सब्सिडी, लाभ, वार्षिक रीसाइक्लिंग क्षमता और किन सेक्टरों को मिलेगा फायदा।
1500 करोड़ की प्रोत्साहन योजना
केंद्र सरकार ने देश में क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिजों) की रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देने के लिए ₹1500 करोड़ की प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दी है। इस योजना का मकसद द्वितीयक स्रोतों से खनिजों के अलगाव और उत्पादन की घरेलू क्षमता विकसित करना है। इसके तहत हर साल 270 किलो टन रीसाइक्लिंग क्षमता तैयार करने और करीब 40 किलो टन क्रिटिकल मिनरल्स का उत्पादन करने का लक्ष्य रखा गया है।
सरकार को उम्मीद है कि इस पहल से लगभग ₹8,000 करोड़ का निवेश आएगा और करीब 70,000 लोगों को सीधे व अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। इससे न केवल देश में खनिज संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा बल्कि आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी मजबूती मिलेगी।
योजना की अवधि और सब्सिडी प्रावधान
1500 करोड़ की प्रोत्साहन योजना यह योजना वित्त वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक 6 वर्षों के लिए लागू रहेगी। इसके तहत केवल वही इकाइयाँ पात्र होंगी जो वास्तविक रीसाइक्लिंग में शामिल होंगी। रीसाइक्लिंग का कार्य ई-वेस्ट, लिथियम आयन बैटरियों का स्क्रैप और पुराने वाहनों के कैटलिटिक कन्वर्टर्स जैसे स्रोतों से होगा। सरकार इसमें प्लांट, मशीनरी और यूटिलिटी पर 20% कैपेक्स सब्सिडी देगी और समय पर उत्पादन शुरू करने पर पूरी सब्सिडी का लाभ भी सुनिश्चित किया जाएगा।
क्यों बढ़ गई है इस योजना की जरूरत
क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई चेन विकसित करने में लंबा समय लगता है, क्योंकि इसमें खनन की खोज, नीलामी, खदानों का संचालन और विदेशी खनिज परिसंपत्तियों की खरीद जैसे जटिल चरण शामिल होते हैं। ऐसे में, जब तक देश में खुद का उत्पादन पूरी तरह शुरू नहीं होता, तब तक इन खनिजों की रीसाइक्लिंग ही सबसे तेज़, किफायती और व्यावहारिक विकल्प मानी जा रही है।
वार्षिक रीसाइक्लिंग क्षमता का अनुमान
सरकार का अनुमान है कि 1500 करोड़ की प्रोत्साहन योजना से देश में हर साल लगभग 270 किलो टन रीसाइक्लिंग क्षमता तैयार होगी, जिससे करीब 40 किलो टन क्रिटिकल मिनरल्स का उत्पादन संभव होगा। इसके जरिए लगभग ₹8,000 करोड़ का निवेश आने और करीब 70,000 लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है। इस योजना को लागू करने से पहले सरकार ने उद्योग जगत और अन्य हितधारकों के साथ कई दौर की चर्चा और परामर्श भी किया है।
रीसाइक्लिंग के मुख्य स्रोत
योजना का फोकस विशेष रूप से ई-कचरा, लिथियम-आयन बैटरी स्क्रैप और पुराने वाहनों के कैटेलिटिक कन्वर्टर्स पर है। इन स्रोतों से खनिजों की रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देना इसका मुख्य उद्देश्य है।
किस उद्योग को होगा सीधा लाभ?
सरकार की 1500 करोड़ की प्रोत्साहन योजना इस स्कीम से रिसाइक्लिंग और मेटल प्रोसेसिंग कंपनियों को बड़ा फायदा मिलेगा। इलेक्ट्रिक वाहन (EV), बैटरी निर्माण, सौर ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों में भी मांग बढ़ने की उम्मीद है। अगर कैबिनेट से मंजूरी मिलती है, तो इन सेक्टरों से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में तेजी देखने को मिल सकती है।
कैसे आगे बढ़ेगी योजना
कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद सरकार जल्द ही इस योजना को लागू करने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर सकती है। यह स्कीम भारत की औद्योगिक और आर्थिक नीतियों को नई मजबूती देने के साथ-साथ पर्यावरण के अनुकूल तकनीकों को भी प्रोत्साहित करेगी। इसके जरिए देश में सस्टेनेबल डेवलपमेंट को बढ़ावा मिलेगा और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल भारत को वैश्विक क्रिटिकल मिनरल्स मार्केट में मजबूत पहचान दिला सकती है। लंबे समय में यह योजना न केवल रोजगार और निवेश बढ़ाने में मदद करेगी, बल्कि भारत को खनिज संसाधनों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी एक बड़ा कदम साबित होगी।
नोट: यह ब्लॉग केवल जानकारी के उद्देश्य से है। आवेदन करने से पहले कृपया सरकारी वेबसाइट पर जाकर नवीनतम निर्देशों और पात्रता की पुष्टि जरूर करें।
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